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VC की नियुक्ति को लेकर राज्यपाल व सीएम आमने-सामने

शिमला-16 अगस्त.प्रदेश सरकार और राजभवन एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी पालमपुर व हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी नौणी में कुलपति की नियुक्ति को लेकर आमने सामने आ गए है।

सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि कुलपति को चांसलर की पावर स्टेट लेजिस्लेटिव ने दी है। उन्होंने कहा, विधानसभा ने गवर्नर को चांसलर नियुक्ति किया है, तो सरकार की डायरेक्शन पर अमल होना चाहिए। स्टेट लेजिस्लेटिव ने कहा, जो भी यूनिवर्सिटी होगी, उसमें चांसलर गवर्नर होंगे वो संवैधानिक नहीं है, वो राज्य सरकार द्वारा दी गई शक्तियां है। उन्होंने कहा कृषि मंत्री जगत सिंह नेगी और कृषि सचिव सी पालरासू ने पत्र लिखकर राजभवन को कहा, आप अभी पालमपुर और नौणी यूनिवर्सिटी के कुलपति की एड को विज्ञापित न करें। राज्य सरकार ने इस विज्ञापन को वापस लिया। मगर राजभवन ने फिर भी कुलपति के आवेदन की डेट बढ़ा दी। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा, वह जल्द राज्यपाल से मिलेंगे। कुलपति की नियुक्ति मामले में उनसे बात करेंगे। उन्होंने कहा कि राजभवन में और भी कई एक्ट लंबित है।

वहीं राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा, हाईकोर्ट के निर्णय पर वह कमेंट नहीं करेंगे। वह जानते हैं कि उन्होंने यूनिवर्सिटी के हित में जो कुछ किया, वो सही था। हाईकोर्ट ने उस पर स्टे दिया, वह उसका आदर करते हैं। उन्होंने कहा, वह फैसला जनता पर छोड़ेंगे, नौणी और पालमपुर यूनिवर्सिटी के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है, जनता सोच विचार करें, समझ में अपने आप आ जाएगा।

बता दें कि राजभवन ने 21 जुलाई को चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में कुलपति की नियुक्ति के लिए एक विज्ञापन जारी किया। 12 अगस्त को राज्य सरकार ने इस विज्ञापन को खारिज कर दिया। 13 अगस्त को राजभवन ने इस विज्ञापन को कंटीन्यू करते हुए आवेदन की तिथि 18 अगस्त तक बढ़ा दी। 14 अगस्त को हाईकोर्ट ने 21 जुलाई के राजभवन के विज्ञापन पर स्टे लगा दिया। सरकार को इस मामले में चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता एवं कृषि विश्वविद्यालय के प्रधान वैज्ञानिक अजय दीप बिंद्रा की याचिका पर यह स्टे लगाया है।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि भर्ती के नोटिस में प्रोफेसर के समकक्ष पदों पर कार्यरत योग्य उम्मीदवारों को आवेदन करने से वंचित किया गया है, यह इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च के निर्देशों के अनुरूप नहीं है। विज्ञापन में नोटिस के समक्ष शब्द होना चाहिए था, ताकि प्रोफेसर के बराबर पदों पर कार्यरत योग्य शिक्षक भी आवेदन कर सके।

वहीं महाधिवक्ता ने अदालत को बताया, कुलपति की भर्ती के लिए नोटिस जारी करने का अधिकार राज्यपाल के सचिव को नहीं है, बल्कि नोटिस कृषि और बागवानी विभागों के प्रशासनिक प्रमुखों की ओर से जारी किया जाना चाहिए।

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