नई दिल्ली-07 फरवरी.भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 फ़रवरी को घोषणा की कि मोनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो दर में 25 bps की कटौती कर इसे 6.50% से घटाकर 6.25% करने का फ़ैसला किया है। बता दें कि RBI गवर्नर के रूप में अपनी पहली MPC में, मल्होत्रा ने 5 वर्षों में पहली RBI दर में कटौती की है। गवर्नर ने यह भी कहा कि मोनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) का नीतिगत रुख “न्यूट्रल” रहेगा, जिसका अर्थ है कि आने वाले महीनों में RBI जरूरत के हिसाब से ब्याज दरों में बदलाव कर सकता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय कमजोर विकास दर, कड़ी नकदी परिस्थितियों,गिरते रुपये और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि मोनेटरी पॉलिसी कमेटी के फैसले देश के सभी नागरिकों के जीवन को प्रभावित करते हैं। यह फैसला बिजनेस, इकॉनॉमिस्ट्स और सभी के लिए प्रासंगिक है।RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई दर अब RBI के तय लक्ष्य के अनुरूप संतुलित हो रही है, और इसी कारण MPC ने रेपो रेट में कटौती का फैसला लिया है। 2020 के बाद से, RBI ने ब्याज दरों को 7 बार बढ़ाकर 6.50% तक पहुंचा दिया था। लेकिन फरवरी 2023 के बाद से रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया था। अब RBI ने लगभग 5 वर्षों में पहली बार बेंचमार्क दरों में कटौती की। उसने पिछली बार मई 2020 में रेपो दर में 40 bps की कटौती कर इसे 4% कर दिया था।
रेपो दर में 25 bps की कटौती करने से ब्याज दरों में कटौती से आम लोगों और व्यवसायों को फायदा होगा। होम लोन, कार लोन और अन्य लोन की ब्याज दरें कम हो सकती हैं, जिससे लोन लेने वालों को राहत मिलेगी। बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा, जिससे व्यापार और निवेश में सुधार हो सकता है। हालांकि, बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले ब्याज दरों में कमी आ सकती है। ब्याज दरों में कटौती से स्टॉक मार्केट में भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
