शिमला-23 जुलाई. शिमला में स्क्रब टायफस का पहला मामला सामने आया है। स्क्रब टायफस की दस्तक से स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC शिमला में 32 वर्षीय महिला का टेस्ट पॉजिटिव आया है जिसका उपचार IGMC में चल रहा है महिला की हालत स्थिर बताई जा रही है। IGMC के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव ने बताया कि बुधवार को 8 मरीजों के नमूने लिए गए जिसमें एक महिला का टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है। 32 वर्षीय महिला शिमला की रहने वाली है।
चिकित्सकों के मुताबिक स्क्रब टायफस एक संक्रामक रोग है, जो घास या झाड़ियों में पाए जाने वाले पिशु (चिगर माइट) के काटने से फैलता है। यह बीमारी आमतौर पर मानसून और बरसात के मौसम में सक्रिय हो जाती है और अगर समय पर इलाज न हो तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
IGMC के चिकित्सकों ने जानकारी दी है कि मरीज को समय पर अस्पताल लाया गया, जिससे उसे उचित उपचार मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से खुले मैदानों, खेतों या झाड़ियों में काम करते समय सावधानी बरतने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रब टायफस के लक्षणों में तेज़ बुखार, शरीर में दर्द, सूजन, लाल दाने और कमजोरी शामिल हैं। यदि समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह फेफड़े, किडनी और अन्य अंगों को नुकसान पहुँचा सकता है। प्रदेश में हर साल बरसात के दौरान स्क्रब टायफस के कई मामले सामने आते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट कर दिया है और आवश्यक दवाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश जारी किए हैं। जनता से अपील की गई है कि यदि किसी को तेज बुखार या त्वचा पर घाव नजर आएं, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवाएं। स्क्रब टायफस का समय रहते इलाज पूरी तरह संभव है, बशर्ते लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए।