Breaking: IGMC मारपीट विवाद के बाद जागी प्रदेश सरकार,डॉक्टरों को अनुशासन, नैतिकता और व्यवहार का पढ़ाएगी पाठ


शिमला-06 जनवरी. IGMC शिमला में डाक्टर और मरीज मारपीट मामले के बाद प्रदेश सरकार ने कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। सरकार ने चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। कमेटी मेडिकल कालेज एवं अस्पतालों में नैतिक आचरण, व्यवहार और शिष्टाचार से जुड़े नियमों की निगरानी करेगी।

सरकार की अधिसूचना के अनुसार मेडिकल कालेजों, अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में शांतिपूर्ण, स्वस्थ और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखना अनिवार्य है। हाल के वर्षों में सामने आए विवादों, शिकायतों और घटनाओं ने सरकार को यह कदम उठाने पर मजबूर किया है। भले ही राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग पहले से ही नैतिक आचरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर चुका है, जमीनी स्तर पर उनके पालन को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।

समिति की अध्यक्षता निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान करेंगे, जबकि IGMC के प्रिंसिपल को सदस्य सचिव बनाया गया है। समिति में स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक, डेंटल हेल्थ सेवाएं निदेशक, डीएमई व डीएचएस के अतिरिक्त, संयुक्त निदेशक, आइजीएमसी, डा. आरकेजीएमसी हमीरपुर, डा. आरपीजीएमसी टांडा और नेरचौक मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल, आइजीएमसी के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, चमियाणा स्थित सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और नेरचौक मेडिकल यूनिवर्सिटी के सीईओ को शामिल किया गया है।

सरकार ने समिति को 15 दिन के भीतर सिफारिशें और विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर सौंपने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद इन्हें लागू किया जाएगा। माना जा रहा है कि इन एसओपी के तहत डाक्टर-मरीज व्यवहार, स्टाफ अनुशासन, कार्यस्थल शिष्टाचार और शिकायत निवारण तंत्र को और कड़ा किया जाएगा। इसमें सरकार ने अप्रत्यक्ष रूप से यह चेतावनी भी दे दी है कि अब नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई तय है। मेडिकल संस्थानों में अनुशासन, नैतिकता और व्यवहार अब सलाह नहीं, आदेश होंगे।


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