शिमला-13फरवरी. सुप्रीम कोर्ट में आज हिमाचल प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर सुनवाई होनी है. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ इस मामले को सुनेगी. हिमाचल पंचायत चुनाव को लेकर प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दायर की है.
ज्ञात रहे कि हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि 30 अप्रैल से पहले प्रदेश में पंचायती राज चुनाव संपन्न कराए जाएं. अदालत ने यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिया था. हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अब राज्य सरकार ने सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में यह मामला प्रधान सचिव बनाम डिक्कन कुमार ठाकुर शीर्षक से सूचीबद्ध है. राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (पंचायती राज) याचिकाकर्ता हैं. वहीं, जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता डिक्कन कुमार ठाकुर को प्रतिवादी बनाया गया है. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों के जिलाधीश (DC) को भी प्रतिवादी बनाया गया है. जिला चुनाव अधिकारी होने के नाते उन्हें मामले में पक्षकार बनाया गया है.
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि प्रदेश में हाल ही में भारी बारिश और आपदा के कारण नुकसान हुआ है. कई स्थानों पर बहाली (रेस्टोरेशन) का कार्य अभी जारी है. सरकार का कहना है कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू है, इसलिए इस समय चुनाव कराना संभव नहीं है. सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम संसद द्वारा बनाया गया कानून है, जबकि पंचायती राज कानून राज्य विधानसभा का है. ऐसे में संसद का कानून प्राथमिकता रखता है.
राज्य सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट ने चुनाव कराने के लिए जो समय सीमा तय की है, वह पर्याप्त नहीं है. चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए अधिक समय की जरूरत है. सरकार का यह भी कहना है कि इन सभी पहलुओं पर हाई कोर्ट ने पूरी तरह विचार नहीं किया. अब इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा.
