शिमला-14 नवंबर. बहुचर्चित सीपीएस मामले पर प्रदेश उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कांग्रेस सरकार ने हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है, जबकि बीजेपी ने कैविएट फाइल की है। हाईकोर्ट के इन आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट के आदेशों के बाद हिमाचल के एडवोकेट जनरल अनूप रत्न ने स्पष्ट कर दिया था कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने असम केस को आधार बनाकर फैसला सुनाया है, जबकि हिमाचल और असम का एक्ट अलग-अलग है। इसी ग्राउंड पर सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लगेगा।
बता दें कि बुधवार को ही हिमाचल हाईकोर्ट ने बीते प्रदेश सरकार द्वारा बनाए 6 सीपीएस की नियुक्ति रद्द करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने इनकी नियुक्तियों को असंवैधानिक बताया है और 2006 के सीपीएस एक्ट को भी निरस्त कर दिया है। इसके साथ कोर्ट ने CPS की सारी सरकारी सुविधाएं तुरंत प्रभाव से वापस लेने के आदेश दिए।
उधर, विपक्षी दल व मुख्य याचिकाकर्ता बीजेपी ने भी सीपीएस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बीजेपी ने आज सुप्रीम कोर्ट में कैविएट फाइल कर दी है ताकि हिमाचल सरकार की एसएलपी स्वीकार करने से पहले बीजेपी भी शीर्ष अदालत में अपना पक्ष रख सके। बीजेपी ने चौपाल के विधायक बलवीर वर्मा की ओर से यह केविएट फाइल की है।
बता दें कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांग्रेस के 6 विधायकों अर्की से संजय अवस्थी, कुल्लू से सुंदर सिंह ठाकुर, बैजनाथ से किशोरी लाल, रोहडू से एमएल ब्राक्टा और पालमपुर से आशीष कुमार को CPS बनाया था। जिसके बाद कल्पना नाम की एक महिला के अलावा BJP के 11 विधायकों और पीपल फॉर रिस्पॉन्सिबल गवर्नेस संस्था ने CPS की नियुक्ति को असंवैधानिक बताते हुए हिमाचल हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
