शिमला-28 जुलाई. सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी वन भूमि पर कब्जा कर लगाए गए बगीचों से सेब पौधे काटने पर रोक लगा दी है. हिमाचल हाईकोर्ट ने 2 जुलाई को सरकारी वन भूमि पर कब्जा कर लगाए गए सेब पौधों को काटने का आदेश जारी किया था. हाईकोर्ट के आदेश के बाद ऊपरी शिमला के चैथला इलाके व अन्य स्थानों से सरकारी वन भूमि पर लगाए गए बगीचों से फलों से लदे पौधे काटे जा रहे थे. इसके खिलाफ शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर टिकेंद्र सिंह पंवर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. अब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीआर गवई की अगुवाई वाली खंडपीठ ने ये रोक लगाई है.
बता दें कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी वन भूमि पर कब्जा कर सेब बगीचे विकसित करने के मामले में समय-समय पर कई सख्त आदेश पारित किए हैं. इस बार दो जुलाई को हाईकोर्ट ने कब्जाई गई भूमि पर से सभी पौधे काटने व भूमि को कब्जा मुक्त करने के आदेश दिए थे. राज्य सरकार ने भी माना था कि सेब पौधे काटने नहीं चाहिए, बल्कि उनकी ऑक्शन की जा सकती है. राज्य सरकार ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की बात कही थी. सेब उत्पादक संघ भी हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार पौधों पर आरी चलाने के खिलाफ था. अब सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने सेब पौधों को न काटने और फलों की नीलामी को लेकर भी आदेश जारी किए हैं. हाईकोर्ट के आदेश के बाद से लेकर अब तक चार हजार से अधिक सेब पौधे काटे जा चुके हैं. माकपा नेता व पूर्व विधायक राकेश सिंघा इस मामले में प्रभावितों से मिलकर उनके पक्ष को सोशल मीडिया के माध्यम से सामने लाने का काम कर रहे हैं. शिमला में सेब उत्पादक संघ के बैनर तले 29 जुलाई को सचिवालय के समक्ष प्रदर्शन भी किया जाएगा. ऊपरी शिमला से संबंध रखने वाले राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री रोहित ठाकुर भी इस मामले में कह चुके हैं कि वो पेड़ काटने के पक्ष में नहीं हैं. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से सीमांत बागवानों ने राहत की सांस ली है.