नई दिल्ली-17अगस्त. बिहार की मतदाता सूची को लेकर छिड़ा बवाल लगातार बढ़ता जा रहा है. विपक्ष के आरोप हैं कि केवल 6 महीने के भीतर लाखों मृत मतदाताओं के नाम सामने आए हैं और यह सब किसी साजिश का हिस्सा है. राहुल गांधी ने तो यहां तक कह दिया कि चुनाव आयोग वोट चोरी कर रहा है. उनके इस बयान के बाद सड़क से लेकर संसद तक हंगामा मचा हुआ है. इन आरोपों के बीच आज रविवार को चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले पर सफाई दी.
चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट कहा कि आयोग पूरी तरह निष्पक्ष है और मतदाता सूची को साफ करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है. उन्होंने बताया कि 22 लाख मृत मतदाता असल में पिछले 20 सालों में मरे थे, लेकिन रिकॉर्ड में अपडेट नहीं हो पाए थे. ये नाम अब एनमरेशन फॉर्म के जरिए सामने आए हैं, इसलिए अचानक से इतने आंकड़े दिखाई दिए.ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मतदाता सूची में गलत नाम आ जाना कोई नई बात नहीं है. कभी किसी का नाम छूट जाता है, तो कभी मृत मतदाता का नाम हट नहीं पाता. उन्होंने माना कि मतदाता सूची को परफेक्ट करना एक साझी जिम्मेदारी है. इस बार बिहार में बीएलओ ने राजनीतिक दलों और उनके बीएलए के साथ मिलकर काम किया है.
उन्होंने साफ किया कि अभी तक किसी भी राजनीतिक दल ने आधिकारिक तौर पर दावे और आपत्तियां दर्ज नहीं की हैं. इसका मतलब है कि सभी दल इस प्रक्रिया में साथ शामिल रहे हैं और अब मिलकर ही मतदाता सूची को बेहतर बनाया जा सकता है.हालांकि आयोग का कहना है कि यह सब गड़बड़ी अचानक की नहीं है बल्कि पिछले दो दशकों में जमी हुई गलतियों को अब सुधारा जा रहा है. बीएलओ को ट्रेनिंग दी गई है और आगे ऐसी गड़बड़ियों की संभावना कम होगी.
चुनाव आयोग ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक चश्मे से देखने पर चिंता जताई. चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने कहा कि मतदाता सूची को साफ करना किसी एक दल या आयोग का काम नहीं बल्कि एक साझा जिम्मेदारी है. सभी राजनीतिक दलों को इसमें सक्रिय सहयोग करना चाहिए. उन्होंने विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों से अपील की है कि वे इस मुद्दे को राजनीति का हथियार न बनाएं, बल्कि मिलकर मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाने में मदद करें.