Breaking: रिज मैदान पर पूर्व सीएम स्व. वीरभद्र सिंह की प्रतिमा स्थापित


शिमला-16 जून. हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम स्व राजा वीरभद्र सिंह की प्रतिमा रीज पर स्थापित हो गई है। PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने अपने पिता एवं 6 बार के CM वीरभद्र सिंह की शिमला के रिज पर प्रतिमा नहीं लगाने पर मिनिस्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। अब उनकी यह इच्छा पूरी हो गई है। वीरभद्र सिंह की प्रतिमा बीती रात को ही शिमला में लाई गई। आज इसे रिज के दौलत सिंह पार्क में स्थापित कर दिया गया है। वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का 15 जुलाई को सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे इत्यादि राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी में अनावरण किया जाएगा। वीरभद्र सिंह की प्रतिमा हिमाचल निर्माता एवं प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार की प्रतिमा की बगल में लगाई गई है। अनावरण नहीं होने तक इसे ढककर रखा जाएगा।

बता दें कि आज वीरभद्र सिंह की धर्मपत्नी प्रतिभा सिंह का 70 जन्मदिवस है।उनके जन्मदिवस पर वीरभद्र सिंह की प्रतिमा को स्थापित किया गया है। पहले 23 जून को उनके जयंती पर प्रतिमा का अनावरण होना था लेकिन अब ईद तिथि को बदलकर 15 जुलाई को किया जाएगा। इस प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम के लिए विक्रमादित्य सिंह खुद दिल्ली जाकर सोनिया, प्रियंका गांधी समेत तमाम राष्ट्रीय नेताओं को न्योता दे चुके हैं। पूर्व में 23 जून को वीरभद्र जयंती पर इस प्रतिमा का अनावरण कराया जाना था। मगर, उस दिन सोनिया-प्रियंका के दूसरी जगह कार्यक्रम तय होने की वजह से प्रतिमा का अनावरण अब 15 जुलाई को कराने का फैसला लिया गया है।

शिमला का रिज टूरिज्म की दृष्टि से दुनियाभर में मशहूर है। यहां पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गज नेताओं की पहले से प्रतिमा स्थापित है। अब वीरभद्र सिंह की प्रतिमा भी स्थापित कर दी गई है। वीरभद्र सिंह का निधन 8 जुलाई 2021 को हुआ था।

इस दौरान उनके आंसू निकल आए थे। उन्होंने सवाल उठाए कि पूर्व सरकार BJP सरकार ने रिज पर वीरभद्र सिंह की प्रतिमा लगाने को मंजूरी दे दी थी। मगर उनकी अपनी ही सरकार ने वीरभद्र सिंह की प्रतिमा नहीं लगा रही। इससे वीरभद्र समर्थक मायूस हैं। इससे आहत विक्रमादित्य ने इस्तीफे का ऐलान कर डाला।

सुक्खू सरकार का जाना तय माना जा रहा था

विक्रमादित्य के इस्तीफे के बाद सुक्खू सरकार का जाना लगभग तय माना जा रहा था, क्योंकि विक्रमादित्य के इस्तीफे से एक दिन पहले ही राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के 6 विधायकों समेत 3 निर्दलीय ने भी क्रॉस वोट किया।

इससे हिमाचल विधानसभा में बहुमत वाली कांग्रेस सरकार राज्यसभा चुनाव हार गई। बीजेपी के हर्ष महाजन और कांग्रेस प्रत्याशी अभिषेक मनु सिंघवी को बराबर यानी 34-34 वोट मिले। पर्ची सिस्टम से हर्ष महाजन चुनाव जीत गए।

ऐसे में अगले दिन विक्रमादित्य सिंह के इस्तीफे के बाद तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थी। उनके BJP में जाने की चर्चाएं भी तेज हो गई थी, क्योंकि वह क्रॉस वोट करने वाले विधायकों से मिलने चंडीगढ़ भी पहुंचे।

28 फरवरी 2024 को विधानसभा परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री पद से इस्तीफे का ऐलान करते हुए विक्रमादित्य सिंह
विक्रमादित्य के कारण गिर सकती थी सरकार

सुक्खू सरकार पर संकट इसलिए आया क्योंकि 28 फरवरी को सरकार को बजट पास कराना था। राजनीति के जानकार यह मान रहे थे कि यदि कांग्रेस विक्रमादित्य सिंह बजट पारित करने में वोट नहीं डालते या खिलाफ वोट करते हैं, तो सरकार का बजट पारित नहीं हो पाएगा।

इससे सरकार अल्पमत में आ जाएगी। मगर बजट पारित होने व लंच से पहले से बीजेपी ने सदन में हंगामा किया। इससे विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने ‌BJP के 9 विधायक बजट सत्र के लिए निष्कासित कर दिए। BJP विधायकों के निष्कासन के बाद सुक्खू सरकार ने बजट पारित करवा दिया और सरकार पर सियासी संकट टल गया।

विक्रमादित्य सिंह का इस्तीफा मंजूर नहीं किया था

इस बीच कांग्रेस हाईकमान ने कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिव कुमार और हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को ऑब्जर्वर बनाकर हिमाचल भेजा। इन दोनों नेताओं की मध्यस्थता के बाद कांग्रेस सरकार बच गई और विक्रमादित्य सिंह का इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया।


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