शिमला-22अप्रैल. प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव इस साल दिसंबर में होने हैं. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं. इस बार चुनाव में उन लोगों के लिए बुरी खबर है, जिन्होंने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया है. ऐसे लोग पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे. पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वाला कोई भी व्यक्ति चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकता. इसके अलावा, जिन लोगों पर पंचायत या सहकारी समितियों (कोऑपरेटिव सोसायटी) की देनदारी बकाया हैं, वो भी चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होंगे. पहली बार सहकारी समितियों की देनदारी को अयोग्यता का आधार बनाया गया है. साथ ही, अदालत द्वारा अपराधी घोषित व्यक्ति भी पंचायती राज चुनाव नहीं लड़ सकेगा.
पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा ने कहा अवैध कब्जा करने वाला कोई भी व्यक्ति पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव लड़ने के योग्य नहीं होगा. इसके अलावा, पंचायत या सहकारी समिति की देनदारी बकाया होने पर भी उम्मीदवारी मान्य नहीं होगी.
राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त अनिल कुमार खाची ने सरकार से 30 जून तक परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया है. इससे साल के अंत में प्रस्तावित पंचायती राज चुनावों की तैयारियां समय पर पूरी हो सकेंगी. संभावना है कि दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में चुनाव की घोषणा हो सकती है. पिछली बार 21 दिसंबर, 2020 को चुनाव की घोषणा हुई थी, जिसके बाद 17, 19 और 21 जनवरी, 2021 को तीन चरणों में मतदान हुआ था.
बता दें कि पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल इस साल समाप्त हो रहा है. ऐसे में चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. वर्तमान में जिला परिषद के कुल वार्डों की संख्या 249 है, लेकिन सरकार ने एक नया जिला परिषद वार्ड बनाने की घोषणा की है. इससे अब जिला परिषद वार्डों की संख्या 250 हो जाएगी. इसके अलावा, 10 नए विकासखंड बनने से अब प्रदेश में विकासखंडों की कुल संख्या 91 हो गई है. हालांकि, नए नगर निगम और नगर पंचायतों के गठन के कारण कई पंचायतों को इनमें शामिल कर लिया गया है. परिणामस्वरूप, प्रदेश में पंचायतों की संख्या 3,616 से घटकर 3,577 रह गई है.
