शिमला-28 अप्रैल. शिमला में 24 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में रिज मैदान पर आयोजित कैंडल मार्च में तिरंगा अपमान का मामला सामने आया। मामले पर विश्व हिंदू परिषद के मदन ठाकुर ने इसे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बताते हुए शिमला सदर पुलिस से तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की। मदन ठाकुर ने शिकायत पत्र में कहा कि मार्च के बाद तिरंगे को जमीन पर फेंका गया और मेयर ने इसे गंदगी के साथ डस्टबिन में डाला। उन्होंने मेयर, आयोजकों, और शामिल अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 2 के तहत कार्रवाई की मांग की, जो राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को दंडनीय अपराध मानती है।ठाकुर ने इसे राष्ट्रीय सम्मान के खिलाफ कार्य बताते हुए कहा कि ऐसे लोग किसी पद पर रहने के लायक नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने तिरंगा अपमान के मामले में कार्रवाई नहीं की, तो सड़कों पर विरोध प्रदर्शन होंगे।
हैरानी की बात है कि इस कैंडल मार्च की तस्वीरें, जिनमें उल्टा तिरंगा दिख रहा है, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर भी अपलोड की गईं। इसने विवाद को और बढ़ा दिया। विश्व हिंदू परिषद ने मांग की कि दोषियों को माफी मांगने की अनुमति न दी जाए, क्योंकि यह संवैधानिक अपराध है। हालिया समाचारों के अनुसार, शिमला सदर पुलिस ने शिकायत प्राप्त की है, लेकिन अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई है। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है।
उधर, प्रदेश हाई कोर्ट के अधिवक्ता विनय शर्मा ने कहा कि तिरंगा अपमान गंभीर अपराध है। उन्होंने बताया कि तिरंगे में केसरिया रंग ऊपर और हरा रंग नीचे होना चाहिए। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से ऐसी लापरवाही पर सवाल उठाते हुए इसे चिंताजनक बताया।
विश्व हिंदू परिषद के मदन ठाकुर ने मार्च में शामिल शिमला मेयर, विधायक सुंदर सिंह ठाकुर, मंत्री हर्षवर्धन चौहान, नरेश चौहान और प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि तिरंगा अपमान के साथ-साथ मार्च के बाद कार्यकर्ताओं ने झंडे को जमीन पर फेंक दिया। ठाकुर ने मांग की कि आयोजकों और उपस्थित अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153A और राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत FIR दर्ज हो। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, तो सड़कों पर प्रदर्शन होंगे और “तिरंगे के सम्मान के लिए गर्दन भी कटवाने को तैयार हैं।”