शिमला-02 जून : हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के पूर्व चीफ इंजीनियर विमल नेगी की रहस्यमयी मौत का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। इस मामले में अब नया मोड़ आ गया है। इस केस की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद अब शिमला के एसपी संजीव गांधी ने व्यक्तिगत स्तर पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कोर्ट में लेटर पेटेंट अपील (LPA) दायर कर इस केस में पहले काम कर चुकी एसआईटी जांच को सही बताया है और कोर्ट से उसके निष्कर्षों पर दोबारा विचार करने की मांग की है।
इससे पहले बीते 30 मई को उन्होंने बतौर एसपी इस मामले में अपील तैयार की थी, लेकिन आपत्तियां लगने के कारण उसे नामंजूर कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने व्यक्तिगत हैसियत में यह चुनौती पेश की। संजीव गांधी इस समय मेडिकल लीव पर चल रहे हैं और यह अपील उन्होंने पुलिस अधिकारी के रूप में नहीं बल्कि एक नागरिक के रूप में दायर की है। उनके वकील जगदीश ठाकुर ने इस अपील की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह अपील पूरी तरह से व्यक्तिगत है और इसमें कोर्ट से मांग की गई है कि एसआईटी की जांच को “प्रीविलेज डॉक्यूमेंट” माना जाए और उस पर फिर से गौर किया जाए।स्वतंत्र SIT की मांग, सीबीआई जांच पर सवाल
अपील में संजीव गांधी ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि चूंकि सीबीआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियां केंद्र सरकार के अधीन काम करती हैं, ऐसे में जांच में निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि हाईकोर्ट स्वयं एक स्वतंत्र एसआईटी गठित करे, जिसकी निगरानी भी अदालत ही करे। उन्होंने यह भी मांग की है कि इस केस से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड को कोर्ट तलब करे, ताकि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।
पूर्व डीजीपी के हलफनामे पर उठाए सवाल
अपील में राज्य के पूर्व डीजीपी डॉ. अतुल वर्मा के खिलाफ भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संजीव गांधी का कहना है कि कोर्ट में वर्मा द्वारा दिया गया हलफनामा पक्षपातपूर्ण था और इसका मकसद एसआईटी की जांच को गलत रूप में पेश करना था। उन्होंने अपील में कोर्ट से आग्रह किया है कि इस हलफनामे को रिकॉर्ड से हटाया जाए और उस पर आधारित टिप्पणियों को रद्द किया जाए।
सरकार ने नहीं दी चुनौती, संजीव गांधी की अपील निजी पहल
इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार हाईकोर्ट द्वारा दिए गए सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती नहीं देगी। ऐसे में संजीव गांधी की यह अपील पूरी तरह से उनकी निजी पहल है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार का सख्त रुख
हाईकोर्ट ने चीफ इंजीनियर विमल नेगी की पत्नी किरण नेगी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस जांच में खामियों और विरोधाभासों के चलते केस की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। कोर्ट ने यह भी माना था कि एसआईटी की रिपोर्ट और तत्कालीन डीजीपी द्वारा दाखिल हलफनामे में भारी अंतर है।
इस फैसले के बाद राज्य सरकार ने भी सख्त रुख अपनाया और तत्कालीन डीजीपी अतुल वर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) ओंकार शर्मा और एसपी संजीव गांधी को छुट्टी पर भेज दिया। वर्मा 31 मई को सेवा से रिटायर हो चुके हैं, जबकि बाकी दोनों अधिकारियों के कार्यभार दूसरे अधिकारियों को सौंपे जा चुके हैं।
क्या है पूरा मामला?
विमल नेगी 10 मार्च को रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गए थे। आठ दिन बाद उनका शव बिलासपुर के गोविंद सागर झील से बरामद हुआ था। पहले शिमला पुलिस की एसआईटी ने डेढ़ महीने तक इस मामले की जांच की लेकिन मृतक की पत्नी ने इसे पक्षपातपूर्ण बताते हुए हाईकोर्ट से सीबीआई जांच की मांग की थी। अब सीबीआई की टीम शिमला में डेरा डाल चुकी है और जांच कर रही है। टीम ने पुलिस से केस से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड भी ले लिया है।