शिमला-23 दिसंबर. बहुचर्चित गुड़िया प्रकरण से जुड़ी एक बड़ी खबर हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट से सामने आई है। अदालत ने हिमाचल प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (IGP) जहूर हैदर जैदी की जेल की सजा को निलंबित कर दिया है। ज़ैदी को इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
न्यायाधीश अनूप चितकारा और सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने जैदी को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत राशि जमा करने पर रिहा करने का आदेश दिया है। यह निलंबन अपील के लंबित रहने तक प्रभावी रहेगा जैदी पहले ही 5 साल, 2 महीने और 14 दिन की जेल काट चुके हैं। कोर्ट ने माना कि अपील पर अंतिम सुनवाई में अभी समय लग सकता है।
कोर्ट ने यह भी पाया कि आरोपियों का सूरज को मारने का कोई मकसद (Motive) नहीं था, क्योंकि व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर इकबालिया बयान लेने का उनका मुख्य उद्देश्य ही विफल हो जाता। कानूनविदों के मुताबिक सजा निलंबन में अदालत दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा पर अस्थायी रूप से रोक लगा देती है, ताकि वह अपील की सुनवाई के दौरान जेल में न रहे। यह सजा की समाप्ति नहीं होती, बल्कि अंतिम फैसले तक दी गई कानूनी राहत होती है। जानकारी के अनुसार अदालत ने इस संबंध में अपना फैसला एक सप्ताह के लिए सुरक्षित रखा था।
गौरतलब है कि इससे पहले सीबीआई की विशेष अदालत ने वर्ष 2017 के कोटखाई में नाबालिग छात्रा के दुष्कर्म एवं हत्या मामले में संदिग्ध की हिरासत में मौत के मामले में तत्कालीन आईजी जहूर हैदर जैदी सहित आठ पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
यह मामला न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पूरे देश में पुलिस कार्यप्रणाली और हिरासत में मौत जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर लंबे समय तक चर्चा में रहा है। अब हाईकोर्ट के आने वाले फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। गौरतलब है कि सीबीआई के विशेष अदालत ने आठों पुलिसकर्मियों को 18 जनवरी 2025 को दोषी ठहराया था, जबकि 27 जनवरी 2025 को सजा की मात्रा तय करते हुए सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने कहा था कि वर्तमान मामले में हिरासत में संदिग्ध की मौत के बाद उग्र भीड़ ने उस पुलिस थाने को आग के हवाले कर दिया, जहां यह घटना हुई थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पुलिस शक्तियों का दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय है।
जुलाई 2017 में शिमला के कोटखाई में एक नाबालिग लड़की (गुडिया) का शव मिला था । इस मामले की जांच के लिए ज़ैदी के नेतृत्व में एक SIT बनाई गई थी । आरोप था कि SIT ने कुछ लोगों को हिरासत में लेकर उन पर दबाव बनाया और टॉर्चर किया, जिसके दौरान आरोपी सूरज की पुलिस लॉकअप में मौत हो गई थी। बहरहाल, हाईकोर्ट से तत्कालीन आईजी जहूर हैदर जैदी के लिए राहत भरी खबर आई है।
