Breaking:पहलगाम आतंकी हमले के बाद राजभवन से हटाया भारत पाक समझौता टेबल व पाकिस्तान झंडा


शिमला-25 अप्रैल. जम्मू- कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान में तनाव बढ़ गया है। भारत ने जहां सिंधू जल संधि सहित कई फैसले लेते हुए पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। वहीं, पाकिस्तान ने भी शिमला समझौता सस्पेंड कर दिया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता होल्ड करने के फैसले के बाद पाकिस्तान ने शिमला समझौता मानने से इनकार कर दिया है। यह समझौता 3 जुलाई, 1972 को शिमला के बर्नेस कोर्ट भवन में साइन किया गया था, जो अब राजभवन है। भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने इसे साइन किया था। इससे पहले पाकिस्तान 1971 की जंग हार चुका था। इस एग्रीमेंट के जरिए दोनों देशों ने यह प्रण लिया था कि अब वह अपने रिश्तों में सुधार करते हुए रीजन और अपने लोगों की बेहतरीन के लिए काम करेंगे, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

इसके बाद पाकिस्तान के साथ पहले 1984 में सीमित जंग हुई, जिसे ऑपरेशन मेघदूत का नाम दिया गया और इसके जरिए भारत ने सियाचिन ग्लेशियर को वापस ले लिया। फिर 1999 में कारगिल की लड़ाई लड़ी गई, जिसमें हार के बाद पाकिस्तान की सेना को मुंह की खानी पड़ी। इसलिए शिमला समझौते का कोई प्रैक्टिकल प्रभाव दोनों देशों के रिश्तों में पहले भी नहीं था। इसी समझौते का एक हिस्सा था कि दोनों देश बॉर्डर में बदलाव करने के बजाय लाइन ऑफ कंट्रोल का नियम फॉलो करेंगे। इस एग्रीमेंट के तहत बहुत का जीता हुआ क्षेत्र भारत ने वापस कर दिया था और कुछ स्ट्रैटेजिक लोकेशन ही अपने पास रखी थीं। अब पाकिस्तान ने इस एग्रीमेंट से हाथ पीछे खींच लिए हैं।

शिमला के राजभवन में मौजूद यह समझौता टेबल अब नजर नहीं आएगा। ऐसा भारत पाकिस्तान के बीच पनपी दरार के चलते हुआ है। हालांकि यह टेबल दो साल पूर्व ही हटा दिया गया था लेकिन अब पहलगाम हमले के बाद दोबारा इस टेबल पर रखा पाकिस्तानी झंडा पूरी तरह से हटा दिया गया है। शिमला समझौता जिस टेबल पर हुआ था, वह अब भी राजभवन में मौजूद है। राजभवन के मुख्य हॉल में शान से रखा गया है। उस वक्त रखे गए दोनों देशों के छोटे ध्वज भी टेबल पर मौजूद हैं। समझौते की गवाह एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर टेबल के पीछे दीवार पर टंगी हुई है और दो फ्रेम की गई तस्वीरें भी रखीं गई हैं। तमाम सुरक्षा प्रबंधों के बावजूद इस टेबल को राजभवन जाकर देखने वालों को आज भी बिना बिलंब भीतर जाने की इज़ाज़त दी जाती है।


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