शिमला-3 जनवरी. भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में आज संस्थान के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु कुमार चतुर्वेदी द्वारा संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अखिलेश पाठक को उनकी हाल ही में प्रकाशित पुस्तक “देवभूमि की आत्मा: हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति, संगीत, कला और उत्सवों की एक समग्र यात्रा” के लिए बधाई दी गई तथा संस्थान के समस्त अनुभाग अधिकारियों की उपस्थिति में उनका सम्मान किया गया। इस अवसर पर लेखक द्वारा अपनी पुस्तक की प्रति प्रोफेसर चतुर्वेदी को भेंट की गई। गौरतलब है कि इस पुस्तक का विमोचन शिमला के ऐतिहासिक गेटी थियेटर में गुरुवार को किया गया है।
पुस्तक का अवलोकन करने के उपरांत निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने डॉ. अखिलेश पाठक को पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह कृति हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक-संस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को गहन शोध और संवेदनशील दृष्टि के साथ प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि “हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति, संगीत, कला और उत्सवों पर केंद्रित यह पुस्तक न केवल शोधार्थियों, विद्यार्थियों और शिक्षाविदों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी, बल्कि आम पाठकों को भी देवभूमि की सांस्कृतिक आत्मा से जोड़ने का कार्य करेगी। इस प्रकार के सृजनात्मक एवं अकादमिक प्रयास संस्थान की बौद्धिक और सांस्कृतिक गरिमा को और अधिक सुदृढ़ करते हैं।”
अपने वक्तव्य में डॉ. अखिलेश पाठक ने पुस्तक की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कृति हिमाचल प्रदेश के विभिन्न अंचलों में प्रचलित लोक-जीवन, लोक-संगीत, पारंपरिक कलाओं और उत्सवों के दीर्घकालिक अध्ययन, यात्राओं और अनुभवों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि “यह पुस्तक देवभूमि हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संजोने और भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने का एक विनम्र प्रयास है।”
इस अवसर पर डॉ. पाठक ने संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और विश्वास के बिना यह कार्य संभव नहीं हो पाता। उन्होंने संस्थान के समस्त अधिकारियों, सहकर्मियों तथा पूरे संस्थान परिवार के सहयोग के लिए भी हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके साथ ही उन्होंने अपने परिवार के निरंतर सहयोग, धैर्य और समर्थन को स्मरण करते हुए कहा कि पारिवारिक संबल के बिना इस प्रकार का सृजनात्मक कार्य पूर्ण नहीं हो सकता। डॉ. पाठक ने पुस्तक के प्रकाशक सतलुज प्रकाशन के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग, विश्वास और प्रकाशन संबंधी मार्गदर्शन के कारण यह पुस्तक पाठकों तक पहुँच सकी।
सम्मान समारोह के दौरान संस्थान के विभिन्न अनुभागों के अधिकारी उपस्थित रहे और सभी ने डॉ. अखिलेश पाठक को उनकी इस साहित्यिक उपलब्धि के लिए शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम का वातावरण सौहार्दपूर्ण एवं प्रेरणास्पद रहा, जिसमें संस्थान में साहित्य, संस्कृति और शोध के प्रति सतत् प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।
