शिमला-27 दिसंबर. प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान IGMC में बीते दिनों हुए मारपीट मामले का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मारपीट मामले में बर्खास्त डॉ. राघव नरूला की सेवाओं को पुनः बहाल करने के लिए डॉक्टर्स एसोसिएशन अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे हैं। इसी क्रम में शनिवार को IGMC रेजिडेंट डॉक्टर, इंटर्न और मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं ने अटल सभागार भवन के बैडमिंटन कोर्ट में शनिवार को करीब बारह बजे बर्खास्त चिकित्सक की बहाली के लिए नारेबाजी की। एसोसिएशन के कहना है कि बर्खास्तगी के आदेशों के वापस लिए जाने तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा। रेजिडेंट अस्पतालों में सिर्फ आपातकालीन सेवाएं देंगे, वार्ड और ओपीडी में सेवाएं बंद रहेंगी।
RDA अध्यक्ष डॉ. सोहेल शर्मा ने रेजिडेंट और इंटर्न को संबोधित करते हुए कहा कि आईजीएमसी में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना और इसके बाद सिर्फ चिकित्सक पर कार्रवाई से चिकित्सक पेशा और संस्थान की साख को नुकसान पहुंचा है। मात्र छह घंटे में चिकित्सक के निलंबन और 48 घंटे में बर्खास्तगी के हुए फैसले से संदेश गया है कि इसमें सिर्फ चिकित्सक ही दोषी था, जबकि किसी भी हिंसा की घटना के दो पहलू होते है। इस मामले की पूरी जांच किए बिना ही चिकित्सक पर कार्रवाई कर एकतरफा फैसला ले लिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार इस फैसले को वापस ले और चिकित्सक को बहाल करे, चिकित्सकों की अस्पतालों में सुरक्षा सुनिश्चित करे। बर्खास्तगी के इस फैसले के बाद चिकित्सकों को मरीजों का उपचार करना मुश्किल हो जाएगा, कोई भी उन्हें धमका जाएगा। उन्होंने कहा कि डॉ. नरूला की बर्खास्तगी का फैसला न्यायसंगत नहीं है। इसलिए सरकार इस पर पुनर्विचार कर बर्खास्तगी के आदेशों को वापस ले और चिकित्सकों की अस्पतालों में सुरक्षा सुनिश्चित करे। इस मामले में पूरी जांच होने के बाद ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जब तक आरडीए की ये मांगें पूरी नहीं की जातीं, उनकी यह हड़ताल जारी रहेगी। इस हड़ताल को मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के साथ ही सभी मेडिकल कॉलेजों की आरडीए पूरा समर्थन कर रही है। रेजिडेंट सिर्फ आपातकालीन सेवाएं जारी रखेंगे।
