शिमला-15 दिसंबर. हिमाचल प्रदेश से जुड़े करीब 2300 करोड़ फर्जी क्रिप्टो करेंसी पोंजी और मल्टी लेवल मार्केटिंग (MLM) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सख्त कार्रवाई की है। ईडी शिमला ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत हिमाचल प्रदेश और पंजाब में कुल आठ ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के जरिए हिमाचल और पंजाब के लाखों लोगों से करीब 2300 करोड़ रुपये की ठगी की गई। ईडी ने यह जांच हिमाचल प्रदेश और पंजाब के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इन मामलों में सुभाष शर्मा को इस फर्जी क्रिप्टो घोटाले का मास्टरमाइंड बताया गया है। सुभाष शर्मा वर्ष 2023 में देश छोड़कर फरार हो गया था। उसके अलावा कई अन्य सहयोगियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, चिट फंड अधिनियम, 1982, अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम, 2019 और अन्य संबंधित कानूनों के तहत मामले दर्ज हैं। ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने कोर्वियो, वॉस्क्रो, डीजीटी, हाइपनैक्स्ट और ए-ग्लोबल जैसे नामों से फर्जी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म शुरू किए। इन प्लेटफॉर्मों के जरिए हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों के भोले-भाले निवेशकों को बहुत ज्यादा मुनाफे का लालच दिया गया। हकीकत में ये सभी प्लेटफॉर्म न तो पंजीकृत थे और न ही किसी तरह से नियंत्रित। इनका संचालन पूरी तरह पोंजी स्कीम की तरह किया गया, जिसमें नए निवेशकों से ली गई रकम से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने बार-बार फर्जी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म बनाए, उनके टोकन की कीमतों में मनमानी तरीके से हेरफेर किया और जब शक बढ़ा तो प्लेटफॉर्म बंद कर नए नाम से दोबारा शुरू कर दिए, ताकि धोखाधड़ी छिपाई जा सके। निवेशकों से जुटाई गई बड़ी रकम को ठिकाने लगाने के लिए नकद लेन-देन किया गया। इसके लिए नामी बिल्डरों, शेल कंपनियों और आरोपियों व उनके रिश्तेदारों के निजी बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया।
Breaking: फर्जी क्रिप्टो घोटाले पर ED ने हिमाचल व पंजाब में 8 ठिकानों पर की छापेमारी
