शिमला-17सितंबर. करीब 20 वर्षो से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे कम्प्यूटर शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है. प्रदेश हाईकोर्ट ने 20 सालों से सेवाएं देने वाले शिक्षकों को रेगुलर करने के आदेश दिए हैं. हिमाचल हाईकोर्ट ने आउटसोर्स पर लगे कंप्यूटर टीचर्स को पीटीए (पेरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन) के तहत लगाए गए शिक्षकों, ग्रामीण विद्या उपासकों व प्राथमिक सहायक अध्यापकों (पीएटी) की तर्ज पर याचिका दाखिल करने की तारीख से नियमित करने के आदेश जारी किए हैं.
हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य ने इस मामले में मनोज कुमार शर्मा व अन्य 21 शिक्षकों की तरफ से वर्ष 2016 में दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि ये लोग लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए प्रयास कर रहे हैं. अब हाईकोर्ट ने उन्हें याचिका दाखिल करने की तारीख से नियमित करने के आदेश जारी किए हैं.
मामले के विशिष्ट तथ्यों के अनुसार राज्य सरकार की निष्क्रियता का संज्ञान रिट अधिकारिता के प्रयोग में लिया जा सकता है. मामले में प्रतिवादियों द्वारा याचिकाओं की श्रेणी और पीएटी, ग्रामीण विद्या उपासक यानी जीवीयू और पीटीए योजनाओं में प्रारंभिक नियुक्तियों के बाद नियमित किए गए शिक्षकों की श्रेणी के बीच किया जा रहा भेद भी निराधार है. यह स्पष्ट रूप से भेदभाव को दर्शाता है. उपरोक्त श्रेणियों की सेवाओं को नियमित करने का मुख्य मकसद उनकी सेवाओं की प्रकृति वाले स्थायित्व से जुड़ा था.
याचिकाकर्ताओं द्वारा दी गई लंबी सेवाओं और एक हजार से अधिक पदों के सृजन से उन पदों की स्थायी प्रकृति स्पष्ट रूप से स्थापित होती है, जिन पर याचिकाकर्ता कंप्यूटर शिक्षक दशकों से अधिक समय से कार्यरत हैं. ऐसा केवल इसलिए कि उनकी नियुक्ति ऐसी आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से हुई है, जो समय-समय पर बदलती रही हैं. ऐसे में राज्य के दायित्वों को पूरा करने में कंप्यूटर शिक्षकों की तरफ से किए गए कार्य के सार को कम नहीं आंका जा सकता. अदालत ने कहा कि सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए याचिका स्वीकार की जाती है. प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे आज से बारह हफ्ते के भीतर सम्पूर्ण प्रक्रिया पूरी करके वादियों की सेवाओं को कम से कम याचिका दाखिल करने की तिथि से पीएटी, जीवीयू और पीटीए श्रेणियों के बराबर नियमित करें.
