शिमला-11 अगस्त. बहुचर्चित युग हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने तीनों दोषियों की मौत की सजा पर फैसला सुरक्षित रख दिया है। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर व न्यायमूर्ति राकेश कैंथला ने सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. दोषियों ने अपनी सजा के खिलाफ अपील की थी. शिमला की सेशन कोर्ट ने तीनों दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी. सेशन कोर्ट शिमला की तरफ से रेफरेंस के रूप में यह मामला हाईकोर्ट के समक्ष रखा गया था. वहीं, तीनों दोषियों ने दोष सिद्धि के खिलाफ अपील दाखिल की थी. अपील व रेफरेंस पर न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर व न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की विशेष खंडपीठ सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.निचली अदालत ने इस हत्याकांड को रेयरेस्ट ऑफ रेयर की संज्ञा दी है. निचली अदालत की तरफ से सुनाई गई मौत की सजा की पुष्टिकरण के लिए मामला लंबे समय से हाईकोर्ट में चल रहा है.निचली अदालत ने तीन अपहरणकर्ताओं विक्रांत बख्शी, चंद्र शर्मा व तेजिंद्र पाल को मौत की सजा सुनाई थी. तीन अपहरणकर्ताओं ने मास्टर युग को बेरहमी से यातनाएं देकर उसके शरीर पर पत्थर बांधकर जिंदा ही उसे पानी के टैंक में फेंक दिया था.
बता दें कि शिमला के राम बाजार इलाके से जून 2014 में चार साल के बच्चे युग का अपहरण किया गया था. शिमला के ही तीन युवकों विक्रांत बख्शी, चंद्र शर्मा व तेजिंद्र पाल ने करोड़ों रुपए की फिरौती के लालच में अपहरण किया था. बाद में उन्होंने बच्चे की निर्मम हत्या कर दी. मासूम को अमानवीय तरीके से तड़पाया गया और फिर हत्या के बाद उसकी पार्थिव देह को शिमला के उपनगर भराड़ी में पानी के टैंक में फेंक दिया. मामले में हिमाचल पुलिस की सीआईडी ने जांच की थी. सीआईडी ने पक्के सुबूत जुटाकर तीनों दोषियों के खिलाफ मामला तैयार किया था.
शिमला के सेशन कोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह ने 6 सितंबर 2018 को तीनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी. युग का कंकाल अगस्त 2016 यानी अपहरण के दो साल बाद पानी के टैंक में मिला था. न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर का मामला बताया था और दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी. चार साल के मासूम बच्चे को बहुत क्रूर यातनाएं दी गई थीं. बाद में तीनों दरिंदों ने युग के शरीर पर पत्थर बांधे और उसे जिंदा पानी से भरे टैंक में फेंक दिया था.