विमल नेगी मौत मामले पर सीएम सुक्खू बोले BJP कर रही राजनीति


शिमला-26 मई. विमल नेगी मौत मामले पर प्रदेश के DGP और SP शिमला के बीच उपजे विवाद के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को विमल नेगी मामले पर शिमला में पत्रकार वार्ता की। इस दाैरान उन्होंने मामले में भाजपा पर राजनीति करने का आरोप लगाकर जमकर हमला बोला। सीएम सुक्खू ने कहा कि विमल नेगी के परिवार को न्याय मिलना चाहिए। विमल नेगी मामले की जांच के लिए सीबीआई जो भी प्रदेश सरकार से मांगेगी हम सब देने के लिए तैयार है। विमल नेगी ने आत्महत्या की है या किन उनकी कारणों से माैत हुई है उसकी पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए। सुक्खू ने कहा कि जब परिजनों व कर्मचारियों ने विमल नेगी के शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया तो मंत्री जगत नेगी ने मुझसे कहा कि एमडी व निदेशक पर र्कारवाई की जाए। मैंने विमल नेगी की पत्नी से फोन पर बात की और मामले में जांच का भरोसा दिया। लेकिन भाजपा इसमें राजनीति कर रही है। हमने ओंकार शर्मा की अध्यक्षता में भी एक जांच कमेटी गठित की। भाजपा को विमल नेगी के मामले में कोई रुचि नहीं है भाजपा को केवल राजनीति करनी है। हमने एफआईआर दर्ज की, लेकिन रिपोर्ट आने में देरी हुई। मंत्री राजेश धर्माणी को भी विमल नेगी के परिवार से मिलने किन्नाैर भेजा गया था लेकिन परिवार के गांव के बाहर होने के चलते मुलाकात नहीं हो सकी। सीएम ने माना कि हाईकोर्ट में रिपोर्ट देते समय पुलिस अधिकारियों की आपसी खींचतान सामने आई है। डीजीपी कोर्ट में हलफनामा दायर करने से पहले मुझसे मिले और एसआईटी को बदलने की बात कही। मैंने इन्कार किया और कहा कि इससे बेहतर मामले को सीबीआई को साैंपा जाए। पुलिस ने कोर्ट में अलग रिपोर्ट साैंपी और डीजीपी ने अलग हलफनामा दिया।

सीएम ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव की रिपोर्ट में पेखुबेला प्रोजेक्ट को लेकर कई आरोप लगाए गए लेकिन जिन पर आरोप लगाए क्या उनका पक्ष नहीं जानना चाहिए था। इसलिए रिपोर्ट पर कानूनी राय लेने को कहा गया। सीएम ने कहा कि भाजपा मामले में मीडिया ट्रायल कर रही है। कहा कि जयराम को वास्तविकता पर बात करनी चाहिए जनता को गुमराह नहीं करना चाहिए। बार-बार झूठ बोलने से सच नहीं बदल जाता। सीएम सुक्खू ने साफ किया कि अधिकारियों की अनुशासनहीनता हमारी सरकार में सहन नहीं की जाएगी। इसे लेकर समीक्षा की जाएगी और बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विमल नेगी मामले में सरकार कोई अपील दायर नहीं करेगी, हाईकोर्ट के आदेशों की अक्षरशः पालना  सुनिश्चित की जाएगी। 


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