शिमला-16 अप्रैल. प्रदेश सरकार को शराब की नीलामी से उम्मीद के अनुसार राजस्व नहीं मिला है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में शराब से 2850 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके लिए 18 मार्च से राज्यभर में शराब के 2100 ठेकों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन अब तक केवल 1700 ठेकों की ही सफल नीलामी हो सकी है। शेष 240 ठेकों की बोली नहीं लग पाई, जिससे सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी है।
बता दें कि ठेकों की निलामी न होने के चलते सरकार ने फिर से शराब के ठेकों की नीलामी का निर्णय लिया था। इसके लिए सरकार ने पूरे यूनिट के लिए नहीं बल्कि सिंगल ठेके की बिक्री के लिए टेंडर लगाए थे, जिसके लिए आवेदन के साथ 50 हजार की अर्नेस्ट मनी जमा करने का निर्णय लिया गया था। इनकी नीलामी के लिए सरकार ने 9 और 10 अप्रैल को टेंडर आमंत्रित किए थे, लेकिन इसके बाबजूद भी करीब 240 शराब के ठेके नीलाम होने से रह गए थे, परिणामस्वरूप सरकार ने अब निगम और कार्पोरेशन के माध्यम से शराब की बिक्री का निर्णय लिया है। अब हिमफेड, एचपीएमसी, वन निगम, सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन और नगर निगम जैसी सरकारी एजेंसियों के माध्यम से बचे हुए शराब के ठेकों का संचालन किया जाएगा।
यह जानकारी उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने शिमला में मीडिया को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस संबंध में निर्णय ले लिया है और एक-दो दिनों में इन सरकारी एजेंसियों द्वारा शराब की बिक्री शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने पांच जिलों में लगभग 400 ठेकों की बिक्री नहीं हो पाई थी, इनमें से 240 ठेकों को अब सरकारी तंत्र से संचालित किया जाएगा। मंत्री ने माना कि नीलामी दरें अधिक होने के कारण व्यापारियों ने रुचि नहीं दिखाई, जिससे यह स्थिति बनी। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य राज्य सरकार के लिए राजस्व की क्षति को रोकना और शराब वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कहीं भी अव्यवस्था न फैले और सरकारी एजेंसियां तय मापदंडों के अनुसार ही ठेके चलाएं।
