शिमला-11 अप्रैल.प्रदेश डाक विभाग की ग्रामीण शाखाओं में फर्जी दस्तावेज से नौकरी पाने के एक साथ 3 मामले सामने आए हैं। इनमें एक आरोपी राजस्थान, दूसरा हरियाणा और तीसरा बिहार से है। CBI ने शिकायत के आधार पर तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर 10वीं की फर्जी मार्कशीट बनाई और इसी के आधार पर उनका चयन ग्रामीण डाक सेवक के तौर पर हो गया। विभाग ने जब शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन कराया तो पता चला कि यह मार्कशीट फर्जी हैं।
पहले मामले में डाक विभाग ने मैट्रिक परीक्षा के मेरिट के आधार पर शाखा पोस्ट मास्टर, सहायक शाखा पोस्ट मास्टर और ग्रामीण डाक सेवकों के लिए भर्तियां निकालीं। लोकेश सिंह निवासी जिला भरतपुर, राजस्थान को ग्रामीण डाक सेवक के पद पर नियुक्ति मिल गई। उसे सराहन बुशहर उप डाकघर रामपुर, शिमला में तैनाती मिली। 24 फरवरी 2021 से 26 दिसंबर 2023 तक तैनात रहा। लोकेश सिंह की ओर से 10वीं कक्षा की जो मार्कशीट पेश की गई, वह सरकारी परीक्षा निदेशालय, इलाहाबाद, यूपी की ओर से जारी नहीं की गई थी। दूसरे मामले में हरियाणा के जिला चरखी दादरी निवासी ओमवीर की नियुक्ति कुल्लू में ग्रामीण डाक सेवक, शाखा पोस्टमास्टर फोजल बीओ के रूप में वर्ष 2022 में हुई। इसी बीच जब ओमवीर की मार्कशीट को सत्यापन करवाया गया तो अवर सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज की रिपोर्ट के अनुसार यह फर्जी पाई गई। ऐसे में 27 सितंबर 2023 को उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। तीसरे मामले में धर्मशाला मंडल के अधीन शाखा डाकघर अरला में बिहार छपरा सारन निवासी नौशाद कुरैशी का चयन मैट्रिक के अंकों की मेरिट की वरीयता सूची के अनुसार शाखा डाकपाल के पद पर हुआ था। आशंका है कि इस मामले में कोई एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है। इस पर भी सीबीआई हर पहलुओं को खंगाल रही है।
