पटवारी कानूनगो ने अपनी हड़ताल ली वापिस,जानें क्यों


शिमला-12 मार्च. अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चल रहे पटवारी व कानूनगो की हड़ताल खत्म हो गई है। वीरवार से यह सभी लोग काम पर वापस लौटेंगे। आम जनता के जो काम तहसीलों में रूके हुए थे वो अब होने शुरू हो जाएंगे। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के साथ बुधवार को पटवारी व कानूनगो संघ की बैठक हुई है जो सफल रही। इसमें निर्णय लिया गया है कि पटवारी कानूनगो के लिए सरकार ने जो स्टेट कॉडर की अधिसूचना जारी की है वो जारी रहेगी मगर इससे किसी की भी पदोन्नति प्रभावित नहीं होगी। राजस्व मंत्री के आश्वासन के बाद पटवारी कानूनगो संघ ने हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की सहमति जता दी है। स्टेट कैडर में लाए जाने के खिलाफ हड़ताल पर चल रहे पटवारी कानूनगो ने बुधवार को राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के साथ वार्ता कर बिना शर्त हड़ताल खत्म कर दी है। राजस्व मंत्री के साथ विधान सभा में हुई बैठक में मंत्री ने पटवारी कानूनगो को आश्वासन दिया कि स्टेट कैडर से किसी की भी पदोन्नति प्रभावित नहीं होगी और पुराने नियमों के मुताबिक ही पदोन्नति दी जाएगी।

मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि संयुक्त पटवारी कानूनगो संघ के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई है और जो कन्फ्यूजन था उसे क्लियर कर दिया गया है। नेगी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जब तक स्टेट कैडर को लेकर नए आरएंडपी रूल नहीं बन जाते तब तक पुराने नियमों के मुताबिक ही प्रमोशन होंगी जिसके बाद पटवारी कानूनगो ने हड़ताल वापिस ले ली है। इसके अलावा पटवारी कानूनगो के अन्य मुद्दों को लेकर बलवान कमेटी की सिफारिशों को भी सरकार ने माना है और कहा है कि इनमें से कुछेक सिफारिशों पर विचार किया जा रहा है। वहीं संयुक्त पटवारी कानूनगो संघ के अध्यक्ष सतीश चौधरी ने कहा कि हम सरकार के साथ खड़े हैं। कुछ मामलों को लेकर उलझन थी जिसे बैठक में सुलझाने का आश्वासन मिला है। राजस्व मंत्री के आश्वासन के बाद संघ ने हड़ताल को खत्म कर काम पर लौटने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पटवारी कानूनगो आपदा में भी सरकार के साथ खड़े थे और अभी भी सरकार के साथ हैं। सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैय्या करवाने और स्टेट कैडर बनने से पदोन्नति प्रभावित न होने का आश्वासन दिया है जिसके बाद संघ ने हड़ताल को खत्म कर दिया है। वीरवार से वह सभी काम करना शुरू कर देंगे और लंबित सभी कार्यों को शीघ्रता के साथ निपटा दिया जाएगा।


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