पालमपुर -27 जनवरी. पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि भारत का लोकतंत्र मुफ्त रेवड़िया बांटने के कारण एक नये और खतरनाक दौर में शामिल हो गया है। इसके परिणाम चुनाव की व्यवस्था ही नही बल्कि देश की आर्थिक व्यवस्था पर भी भयंकर होगें। उन्होंने कहा कि चुनाव कानून के अनुसार धन देकर वोट लेना एक अपराध है। दुर्भाग्य से यह छूपे रूप में खुलेआम हो रहा है। पार्टियां वायदा कर रही है यदि उनको सब महिलाएं वोट देगी तो उन सब महिलाओं को हर महीने 2500रू0 दिये जाएगे। यह कोई योजना नही है। केवल गरीब महिलाओं के लिए वायदा नही है। करोड़पति महिला परिवार को भी जीतने पर सरकार 2500रू0 महीना देगी। यह सीधे और स्पष्ट रूप में पैसे से वोट खरीदने के अपराध की परिभाषा में आता है। इतना ही नही है कि इस में पैसे देने का वायदा किया है और वोट मिलने पर एक बार नही पूरे पांच साल भ्र्ष्टाचार का यह धन दिया जाता रहेगा।
शांता कुमार ने कहा कि चुनाव में सफल होने के लिए अब सभी पार्टियां इस मुफ्त वायदे के भ्रश्टाचार में शामिल हो गई है। इस वायदे को पूरा करने में बहुत से प्रदेशों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि पार्टी अब गरीबों के आर्थिक विकास की अच्छी नई योजना नही सोच रही, केवल मुफ्त की रेवड़िया बांटने की दिशा में चुनाव की रणनीति बनाई जा रही है।
शांता कुमार ने कहा कि भारत के इतिहास में टी.एन. षेशण नाम के एक चुनाव आयुक्त ने नया इतिहास बनाया था। चुनाव कानून में जिन बातों का स्पष्ट उल्लेख भी नही था, उन्होंने चुनाव कानून की परिधि में उनको लाकर भी कुछ नई परम्परायें शुरू की थी। उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि मुफ्त की रेवडिया बांटने का वायदा करके खुलेआम वोट खरीदने की इस चिन्ताजनक परिस्थिति पर विचार करे और भारत के लोकतंत्र को इस नये भ्र्ष्टाचार से बचाये।
