हिमाचल प्रदेश के इतिहास में 11 जून का दिन पझौता गोलीकांड दिवस के नाम से जाना जाता है. 11 जून 1943 को महाराजा सिरमौर राजेंद्र प्रकाश की सेना द्वारा पझौता आंदोलन के निहत्थे लोगों पर राजगढ़ के सरोट टिले से 1700 राउंड गोलियां चलाई गई.एक तरफ देश में जब भारत छोड़ो आंदोलन चलाया जा रहा था, वहीं देश के कई अन्य ग्रामीण इलाकों की तरह हिमाचल प्रदेश के सिरमौर ज़िले के लोग भी लामबद्ध हो रहे थे, अंग्रेज़ों और उनके सहयोगी शासकों के खिलाफ। सिरमौर के पझोता वैली के लोगों ने भी अपने शासक राजा राजेन्द्र सिंह के खिलाफ बगावत कर रखी थी। लड़ाई थी, गुलामी के खिलाफ, रिश्वतखोरी, उगाही, बुरे बर्ताव, झूठे मुकदमों समेत अत्याचारों के खिलाफ। इसी गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है हर साल 11 जून को…. आंदोलन में कोटला बांगी गांव के लक्ष्मी सिंह, कटोगड़ा गांव के वैद्य सूरत सिंह के अलावा पैण कुफ्फर के मेहर सिंह, जदोल टपरोली के मियां चूंचू राम, अतर सिंह, गुलाब सिंह, धामला के मदन सिंह, बघोट गांव के जालम सिंह, नेरी के कलीराम और शावणी देवी समेत कुछ महिलाओं की भी अहम भूमिका थी।