हाईकोर्ट ने शिमला जिला में वन भूमि पर अवैध कब्जों पर DC शिमला से रिपोर्ट की तलब


शिमला-31 दिसंबर. प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर सख्त रुख अपनाया है. हाईकोर्ट ने शिमला जिला के डीसी व ठियोग के डीएफओ वन भूमि पर कब्जों का सारा ब्यौरा तलब किया है. अदालत ने इस मामले में अवैध कब्जों को लेकर दाखिल की गई जनहित याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए डीसी शिमला और मंडल वन अधिकारी यानी डीएफओ ठियोग को निर्देश जारी किए हैं कि वो तहसील कोटखाई के बागी-रतनाड़ी क्षेत्र में मौजूद प्रत्येक अतिक्रमण करने वालों का पूरा विवरण पेश करें.

हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर व न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले में सख्त आदेश जारी किए हैं. अदालत ने संबंधित अफसरों को शपथपत्र के माध्यम से अवैध कब्जा करने वालों के नाम, पिता का नाम, गांव, उनके स्वामित्व वाली निजी भूमि (यदि कोई हो) और वन भूमि पर किए गए कुल अतिक्रमण क्षेत्र का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने को कहा है. अदालत ने आवश्यक कार्रवाई 15 फरवरी 2026 को या उससे पहले पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं. यह जनहित याचिका बागी-रतनाड़ी क्षेत्र के रहने वाले आरएल चौहान ने दाखिल की है. आरएल चौहान तहसील कोटखाई, जिला शिमला के तहत बागी रतनाड़ी के रहने वाले हैं. उन्होंने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया के नाम एक पत्र लिखा है. उनकी तरफ से लिखे गए पत्र के आधार पर जनहित याचिका दर्ज की गई है.

पत्र में आरोप लगाया गया था कि क्षेत्र में वन भूमि पर अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. हाईकोर्ट ने इस पत्र को स्वतंत्र जनहित याचिका मानते हुए हिमाचल सरकार के मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव/राजस्व सचिव, वन सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, हिमाचल प्रदेश वन विभाग, संभागीय वन अधिकारी, तहसील कोटखाई, जिला शिमला और पटवारी, बागी-रतनाड़ी को प्रतिवादी बनाया है. सभी से जवाब तलब किया गया है.

बता दें कि हिमाचल प्रदेश में वन भूमि पर अवैध कब्जों से जुड़े मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने इन्हें बड़ी बेंच के समक्ष भेजने के आदेश दिए हुए हैं. इस मामले में 18 दिसंबर को पारित आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इन मामलों को एसएलपी सिविल डायरी नंबर 45933/2024 के साथ टैग किया जाए. देश के मुख्य न्यायाधीश से निर्देश हासिल करने के बाद इन्हें लार्जर बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए निर्देश जारी किए हुए हैं.


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