शिमला-02 जनवरी.हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को लेकर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने जानना चाहा है कि क्या आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को रेगुलर करने के लिए राज्य में कोई पॉलिसी लागू है और क्या अब तक किसी आउटसोर्स कर्मचारी को रेगुलर किया गया है। यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें आउटसोर्स कर्मियों की सेवाओं की वैधता को चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि इन तथ्यों की सही जानकारी मिलने से मामले के मुख्य मुद्दे पर फैसला लेने में मदद मिलेगी। कोर्ट ने कहा कि असली सवाल यह है कि क्या स्वीकृत पदों को आउटसोर्सिंग के जरिए भरा जा सकता है, जबकि मौजूदा नियम इसकी अनुमति नहीं देते। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एचपी. फाइनेंशियल रूल्स, 2009 का नियम-112 सरकार के पक्ष में नहीं जा सकता, क्योंकि यह केवल आपातकालीन स्थिति के लिए बनाया गया नियम है। अदालत ने कहा कि आउटसोर्सिंग का सहारा बड़े पैमाने पर रोजगार देने के लिए नहीं लिया जा सकता, क्योंकि यह संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है। कोर्ट के अनुसार आउटसोर्स व्यवस्था से न केवल कर्मचारियों का शोषण होता है, बल्कि उन्हें नियमित कर्मचारियों की तुलना में काफी कम वेतन मिलता है, जो तय पे-स्केल के अनुरूप नहीं होता। यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का खुला उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को लेकर सरकार से जवाब किया तलब
