शिमला-10 अप्रैल. प्रदेश सरकार ने बिजली बोर्ड के उन अफसरों व कर्मचारियों को बोर्ड में वापस आने का विकल्प दिया है, जो प्रतिनियुक्ति पर इससे संबद्ध दूसरे निगमों में कार्यरत हैं। कई साल पहले ये अधिकारी व कर्मचारी ऊर्जा निदेशालय, पावर कारपोरेशन व ट्रांसमिशन कारपोरेशन में चले गए थे क्योंकि सरकार ने इन्हें नए सिरे से गठित किया था और तब एक समझौता भी कर्मचारियों के साथ किया गया था। अब सरकार ने इनको विकल्प दिया है कि वे वापस बिजली बोर्ड में आ सकते हैं। इससे ऊर्जा विभाग के इन सभी उपक्रमों में कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा और फिर सरकार तय करेगी कि कहां पर कितनी नई भर्तियां होनी हैं।
बताया जाता है कि लगभग 400 ऐसे अधिकारी व कर्मचारी हैं, जो कि इन निगमों में काम कर रहे हैं और वे मूलत: बिजली बोर्ड के ही कर्मचारी हैं। बोर्ड में जो सेवा शर्तें उन पर लागू होती हैं, वहीं सेवा शर्तें इन निगमों में भी रखी गई हैं, जिनमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि बोर्ड में यदि यह वापस जाते हैं, तो इनके किसी भी तरह के लाभ प्रभावित नहीं होंगे, वहीं यदि यह लोग इन निगमों में ही रहना चाहते हैं, तो भी इनके कोई लाभ प्रभावित नहीं होंगे। यह केवल सरकार इसलिए कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि बिजली बोर्ड के पास वास्तविकता में आखिर कितने कर्मचारी व अधिकारी कौन-कौन सी श्रेणी के बचते हैं। इसके बाद सरकार देखेगी कि फिर किसे कहां पर लगाना है। बहरहाल 30 अप्रैल तक इस विकल्प के बाद देखना होगा कि कौन-कौन अपना विकल्प देता है।
