नवरात्र उत्सव के तीसरे दिन करें मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा,जानें विधि


शिमला-05 अक्टूबर.शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन आज 5 अक्टूबर शनिवार को है. आज के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बना हुआ है. पंचांग के अनुसार, अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को नवरात्रि का तीसरा दिन होता है. इस दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा करने का विधान है. ये तीसरी नवदुर्गा भी कहलाती हैं. मां पार्वती का यह रौद्र रुप है, जिन्होंने असुरों के संहार के लिए धारण किया था. मां चंद्रघंटा अपनी 10 भुजाओं में कमल, माला, कमंडल, चक्र, गदा, धनुष, तलवार, त्रिशूल आदि धारण करती हैं. उनका वाहन सिंह हैं और उनके माथे पर घंटे के समान चंद्रमा है. इस वजह देवी का नाम चंद्रघंटा है. 

शारदीय नवरात्रि 2024 तीसरा दिन
अश्विन शुक्ल तृतीया तिथि का प्रारंभ: 5 अक्टूबर, आज, 05:30 ए एम सेअश्विन शुक्ल तृतीया तिथि का समापन: 6 अक्टूबर, कल, 07:49 ए एम परहिंदू कैलेंडर के अनुसार, उदयातिथि के आधार पर अश्विन शुक्ल तृतीया आज है.

मां चंद्रघंटा का पूजा मंत्र
1. ऐं श्रीं शक्तयै नमः2. ओम देवी चन्द्रघण्टायै नमः3. स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभू‍तेषु मां चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग
मां चंद्रघंटा की पूजा करते समय गाय के दूध से बनी खीर, सफेद मिठाई, केला और सेब का भोग लगाएं. ये चीजें मां चंद्रघंटा को प्रिय हैं.

मां चंद्रघंटा की पूजा के फायदे
1. देवी चंद्रघंटा की पूजा करने से दुश्मनों पर जीत हासिल होती है. मान-सम्मान और प्रभाव बढ़ता है.

2. यश और कीर्ति के साथ मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को मृत्यु के बाद मोक्ष भी प्रदान करती हैं.

3. वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए भी मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं.

4. यदि आपकी कुंडली में शुक्र दोष है तो आप मां चंद्रघंटा की पूजा करें. धन, सुख, समृद्धि में बढ़ोत्तरी होगी. विवाह का योग बनेगा.

5. जो व्यक्ति देवी चंद्रघंटा की पूजा करता है, उसके परिवार पर आने वाले संकट टल जाते हैं और संतान सुरक्षित र​हती है.


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